*स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से बेहतर रहे जनपद के 4 साल*

– मैटर्निटी विंग के साथ इंसेफेलाइटिस से लड़ने के लिए मिले पर्याप्त साधन
– स्वास्थ्य के लिए 70 नए हेल्थ एण्ड वेलनेस सेण्टर्स बनाएं गए जनपद में

*संतकबीरनगर, 17 मार्च 2021।*

स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से जनपद के पिछले 4 साल बेहतर रहे। लोगों का रुझान इस दौरान सरकारी अस्पतालों की तरफ बढ़ा। जनपद को 100 बेड के मैटर्निटी विंग के साथ ही इंसेफेलाइटिस के प्रकोप से बचने के लिए 20 बेड का पीडियाट्रिक आईसीयू भी मिला। वहीं मगहर और कांशीराम आवासीय योजना में दो नगरीय स्वास्थ्य केन्द्र व  70 नए हेल्थ एण्ड वेलनेस सेण्टर्स भी बनाए गए।प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी व जनपद के एसीएमओ डॉ मोहन झा ने बताया कि जनपद में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर आधारभूत कार्य किए गए। वर्ष 2019 में जेई/ एईएस प्रभावित इस जनपद के लिए जिला अस्‍पताल में 10 बेड के पीआईसीयू ( पिडियाट्रिक इंसेन्टिव केयर यूनिट ) के अतिरिक्‍त 20 बेड का एक अन्‍य पीआईसीयू बनवाने के 1.5 करोड़ रुपए अवमुक्त हुए थे जिससे इसका निर्माण पूरा हुआ । इससे इस पीआईसीयू का निर्माण हुआ। इसके अतिरिक्त जनपद में  17 करोड़ की लागत से 100 वेड का मैटर्निटी विंग भी बनकर तैयार हुआ। नगर पंचायत मगहर तथा कांशीराम आवासीय योजना में दो नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भी बनाए गए। 12 लाख की लागत से कोरोना वैक्सीन को सुरक्षित करने के लिए जिला वैक्सीन स्टोर तथा बघौली में केन्द्रीय औषधि भण्डार में सुविधाएं बढ़ाई गई ।

50 हेल्‍थ एण्‍ड वेलनेस सेण्‍टर बनाए गए जहां पर असंक्रामक बीमारियों का इलाज होगा। इसके साथ ही बुजुर्गों के लिए जेरियाटिक वार्ड,  असंक्रामक बीमारियों के इलाज के लिए एनसीडी सेल, 5 किशोर क्लीनिक विकसित किए गए। वहीं मरीजों के परिजनों के लिए रैनबसेरा का भी निर्माण कराया जा रहा है । गुर्दे के रोगियों के लिए डायलेसिस यूनिट का भी कार्य चल रहा है। क्षय रोगियों की जांच के लिए 3 ट्रूनाट मशीने भी मंगाई गई और उनका व्यवस्थापन किया गया। जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमन्त्री मातृ वन्दना योजना, प्रधानमन्त्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के साथ ही आयुष्मान भारत योजना में तकरीबन 1 लाख गोल्डेन कार्ड बनाए गए। तकरीबन 4 हजार लोगों को इन योजनाओं का लाभ देते हुए 4 करोड़ से अधिक की धनराशि से लोगों का इलाज विभिन्न प्राइवेट चिकित्सालयों में कराया गया।

*जनपद में मौजूद स्वास्थ्य सुविधाएं*

स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं के लिहाज से देखें तो संतकबीरनगर जनपद में एक जिला संयुक्‍त चिकित्‍सालय है, 100 बेड के इस अस्‍पताल में महिलाओं और पुरुषों का एक साथ इलाज किया जाता है। जिले में कुल 6 सीएचसी हैं। तीनों तहसीलों पर तीन सीएचसी एफआरयू मेंहदावल, हैसर व खलीलाबाद हैं। जबकि तीन अन्‍य सीएचसी नाथनगर, सेमरियांवा व सांथा हैं। बघौली, बेलहरकला व पौली हैं। जिले में कुल 19 प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं। इनमें दुधारा, रोशया बाजार, चुरेब और बखिरा 24 गुणे 7 चलने वाले पीएचसी हैं। जबकि सिक्‍टहां, देवकली, औराडाड़, जगदीशपुर, मगहर, कांशीराम आवास, हाड़ापार, परसा झकरिया, परसा पाण्‍डेय, साड़े कला, हरैया मुसहरा, मेंहदूपार, रमवापुर सरकारी, बूधा कला व दानोंकुईया में केवल पीएचसी हैं। जिले में 1 ब्‍लड बैंक, 1 क्षय रोग हास्पिटल मौजूद हैं। इसके अतिरिक्‍त जिले में जेई और एईएस के रोगियों के लिए 6 इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेण्‍ट सेण्‍टर, 3 मिनी पिडियाट्रिक आईसीयू और 1 पीआईसीयू है। वहीं जिले के हर प्राथमिक व सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में जेई व एईएस के वार्ड हैं।

*स्वास्थ्य की दृष्टि से संवेदनशीलता*

जेई / एईएस – तराई क्षेत्र होने के चलते यहां पर जेई और एईएस का प्रकोप रहता है।

एचआईवी/ एड्स – एचआईवी एड्स का प्रसार भी जिले में बहुतायत गांवों में हैं। कई गांव तो ऐसे हैं जहां एड्स के दर्जनों रोगी हैं।

डेंगू ज्‍वर – डेंगू ज्‍वर की बीमारी भी जिले के बखिरा, सेमरियांवा व बेलहर क्षेत्र में प्राय: देखी जाती है।

क्षय रोग – पौष्टिक आहार व पर्यावरण प्रदूषण के चलते क्षय रोग का प्रसार सेमरियांवा, खलीलाबाद, हैसर और पौली ब्‍लाक क्षेत्र में अधिक है।

जल जनित बीमारियां – जिले में आमी और कुआनों नदियों में जल प्रदूषण के चलते भूमिगत जल भी प्रदूषित हो रहा है। इन नदियों के आसपास के इलाकों में जल जनित बीमारियों के साथ किडनी और लीवर के रोगों की समस्‍या अधिक पाई जाती है।